दवाखाने से हुई थी 114 साल पुराने हमदर्द की शुरूआत, अब कोरोना इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का भी शुरू हुआ ट्रायल

दवाखाने से हुई थी 114 साल पुराने हमदर्द की शुरूआत
Image credit: The Better India

रूहअफजा बनाने वाली प्रचलित कंपनी हमदर्द की शुरूआत लगभग 114 साल पहले यानी 1906 में हुई। जिसको हाफिज अब्दुल मजीद और उनके परिवार ने दिल्ली के एक छोटे से दवाखाने से बढ़कर एक बड़ी हमदर्द कंपनी में बदल दिया। यह भी पढ़े: देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन एजुकेशनल कंपनी बनी Byju’s, 9 साल बाद कंपनी की कीमत 73,000 करोड़ रूपए

इतना ही नहीं आज भारत में यूनानी दवाओं के मामले में हमदर्द पहले स्थान पर है। हकीम अब्दुल मजीद का जल्दी ही निधन हो गया था, लेकिन फिर उनकी पत्नी राबिया बेगम ने अपने बेटे हकीम अब्दुल हमीद के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाया।

इसके साथ ही हमदर्द अपनी अन्य दवाओं के लिए भी जाना जाता है। रक्त में विकारों को दूर करने के लिए साफी, सिंकारा, रोगन बादाम शिरीन, जोशीना, स्वालीन जैसे टॉनिक भी बहुत प्रचलन में हैं। यहां तक कि हमदर्द का दिल्ली में जामिया हमदर्द के नाम से प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी है।

1906 से शुरू हुई कंपनी का आज टर्नओवर लगभग 600 करोड़ है। इन सब के बीच खास बात यह है कि इस टर्नओवर में करीब आधी हिस्सेदारी रूहअफजा की ही है। यह भी पढ़े: अल जज़ीरा शिफ़ा समूह के मालिक की रोमांचक कहानी, मजदूरी से लेकर ‘रॉल्स रॉयस’ और ‘फरारी’ तक का सफर

कोरोना इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का भी शुरू हुआ ट्रायल

कोरोनाकाल में अब हमदर्द ने कोरोना इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का ट्रायल भी शुरू किया है। दरअसल, हमदर्द लैबोरेट्रीज ने कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए अपनी दो इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का ट्रायल भी शुरू किया है। कंपनी का कहना है कि दवाओं के ट्रायल की अनुमति मिल गई है, जिनके नाम हैं इन्फुजा और कुलजाम। आयुष मंत्रालय की मंजूरी के बाद हमदर्द की ओर से इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का ट्रायल शुरू किया गया है।


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