भारतीय सरकार की मेक इन इंडिया की नई स्कीम, स्‍मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के लिए 42 हजार करोड़ की योजना

भारत सरकार उन निर्माताओं के लिए लगभग 42,000 करोड़ के नए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) पैकेज को अपने साथ लाई है जो भारत में अपने प्रोडक्ट बनाते हैं। यह भारत सरकार की सबसे बड़ी प्रोत्साहन योजनाओं में से एक है जो मोबाइल फोन और अन्य ऐसे घटकों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करेगी। यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ आंदोलन का हिस्सा है, जिसका प्रमुख मकसद देश को मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है। आपको बता दे मेक इन इंडिया की शुरुआत  25 सितंबर, 2014 को हुई थी।

Indian government's new scheme of Make in India, 42 thousand crore scheme for smartphone making companies
Image credit: SATiiTV.COM

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोडक्शन से जुड़ी इंसेंटिव स्कीम से हाई एंड मोबाइल निर्माताओं और घरेलू निर्माताओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। यह योजना मोबाइल फोन के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने और भारतीय निर्माताओं को चीन पर निर्भरता से दूर करने में मदद करेगी।

क्या है सरकार का मकसद?

सरकार की योजना है कि इन विनिर्माताओं को स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं के लिए वृद्धिशील बिक्री पर 4-6% का लाभ दिया जाए। लाभ पांच साल की अवधि के लिए दिया जाएगा। 2017 के एफडीआई नीति परिपत्र के अनुसार, 200 डॉलर (5,14,580 लगभग) का चालान मूल्य रखने वाले मोबाइल फोन की बिक्री पर बड़ी संख्या में निर्माताओं को प्रोत्साहन की पेशकश की जाएगी।

इन कम्पनियो को मिलेगा फायदा

इस योजना से फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन जैसे अनुबंध निर्माताओं को लाभ होगा। ये कंपनियां पहले से ही भारत में निर्माण कर रही हैं। प्रोत्साहन योजना निश्चित रूप से ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों के लिए एक फायदेमंद साबित होगी, जो high-end वाले मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस बनाने और बेचने के लिए जाने जाते हैं। भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड जैसे लावा, कार्बन, माइक्रोमैक्स और इंटेक्स भी इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।

योजना के मुख्य बिंदु

भारत सरकार की यह योजना आईटी मंत्रालय द्वारा शुरू की जाएगी और साथ ही  इस योजना को  वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों के साथ-साथ नीतीयोग के परामर्श से तैयार किया गया है। एक अधिकारी के अनुसार  इस योजना का प्रमुख मकसद भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट के विनिर्माण का हब बनाना है और चीन व वियतनाम जैसे अन्य विनिर्माण पावरहाउस के साथ खड़ा होना है। आईटी मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विनिर्माण क्षेत्र वीजा प्रतिस्पर्धा वाले देशों की कमी का सामना करता है और यह क्षेत्र पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी के कारण 8.5% से 11% की विकलांगता से ग्रस्त है। इसके अलावा यह डोमेस्टिक सप्लाई चेन व लॉजिस्टिक, उत्पादन में अधिक लागत, गुणवत्ता की शक्ति की अपर्याप्त उपलब्धता, सीमित डिजाइन क्षमताओं और उद्योग द्वारा अनुसंधान व विकास पर ध्यान केंद्रित करना और कौशल विकास में अपर्याप्तता से पीड़ित है।’


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