प्रधानमंत्री के इस भाषण ने मौजूदा यथास्थिति को सुधारने और प्रमुख सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाया

प्रधानमंत्री के इस भाषण ने मौजूदा यथास्थिति को सुधारने और प्रमुख सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाया- सूचना
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हम अपने इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों में है। पिछले वर्ष के विकास कार्यों ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि अगला दशक बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दशक के पहले माह में ही कोविड-19 जैसी घातक बीमारी की मार झेलनी पड़ी जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को विकलांग कर दिया। इस संकट से उबरने के लिए हमें कई बड़े अहम फैसले लेने होंगे और हर चुनौती से सामना के लिए तैयार रहना होगा तभी हम अर्थ्यवस्था को दोबारा पटरी पर ला सकते हैं। अगर भारत तो इस आर्थिक संकट से उबरना है तो कई ठोस कदम उठाने पड़ेंगे। हम उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कृषि के क्षेत्र में श्रम कानूनों में हुए बड़े बदलाव देख चुके हैं।

स्तिथि में सुधार लाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ संदिग्ध इन सुधारों के खिलाफ हैं और समाज सुधार की आड़ में मानवता को खत्म करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस संदर्भ में मार्च में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण में ऐसे ही व्यक्तियों की मानसिकता और सुधारों के लिए उनकी सरकार की प्रतिब्धता का ज़िक्र किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि, “एक समय था जब चीजें एक विशेष वर्ग की भविष्यवाणीयों पर चला करती थीं। जो भी निर्णय उनके द्वारा किए जाते थे, उन्हें अंतिम मान लिया जाता था। लेकिन टेक्नोलॉजी और जनतंत्रीकरण में हुए विकास के कारण, समाज के प्रत्येक वर्ग की राय महत्व रखती है। आज सामान्य जनता मजबूती के साथ जमे जमाए तथाकथित बुद्धिमत्ता के विपरित अपनी राय रख रही है। पहले इसी जनता की आशाओं और अपेक्षाओं पर इस खास वर्ग के तर्क और सिद्धांत हावी हो जाया करते थे।

प्रधानमंत्री ने भाषण को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, “2014 में जब पहली बार पद संभाला तो देश की बड़ी आबादी टॉयलेट, गैस कनेकशन, बिजली और घर जैसी साधारण सुविधाओं के लिए तरस रही थी। हमारे सामने मार्ग था कि पहले से जो चला आ रहा है उसी मार्ग पर चलें, या तो उसे छोड़ें या फिर अपना नया रास्ता बनाएं और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें। हमने बहुत सोच विचार के साथ तय किया कि हम नया मार्ग बनाए और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें। इसमें बड़ी प्राथमिकता दी लोगों कि आकांक्षाओं को।”

प्रधानमंत्री ने ग्लोबल बिजनेस समिट के संबोधन में ध्यान देने के लिए कहा कि, इस विशेष वर्ग की पहचान की विशेषता है कि हमेशा सही चीज़ों के बारे में बात करना। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “सही बात कहने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इस वर्ग को ऐसे लोगों से नफ़रत करते हैं जो सही काम करते हैं। इसलिए जब स्तिथि में बदलाव आने लगते है तो ऐसे लोग व्यवधान देखना शुरू कर देते हैं।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि, “जो लोग खुद को लैंगिक न्याय का मसीहा मानते हैं, वे तीन तलाक के कानून बनाने के खिलाफ हमारे फैसले का विरोध करते हैं। जो लोग दुनिया भर में शरणार्थियों के अधिकारों के लिए दुनिया भर में ज्ञान परोसते हैं, तो जब शरणार्थियों के लिए CAA कानून बनाया जाता है तो उसका विरोध करते हैं। जो लोग दिन रात संविधान की दुहाई देते हैं, वो धारा 370 जैसे अस्थाई व्यवस्था के लिए जम्मू कश्मीर में पूरी तरह संविधान को लागू करने के फैसले का भी विरोध करते हैं। जो लोग आय दिन न्याय कि बात करते हैं, वो सर्वोच्च न्यायालय का एक फैसला अगर उनके अनुकूल नहीं आया, उनके खिलाफ जाने पर देश की सर्वोच्च अदालत की नीयत पर ही सवाल कर देते हैं।

देश हित में हो रहे सुधार और आर्थिक संकटों को हल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए यह शब्द महत्व रखते हैं। निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले से कुछ वर्ग के लोग खुश नहीं हैं। ये व्यक्ति यथास्थिति बनाए रखने में मदद करना चाहते हैं क्योंकि वे इससे सबसे ज़्यादा लाभान्वित होते हैं। 2019 में हुए घटना क्रम दर्शाते है कि प्रधानमंत्री ने यथास्थिति को समाप्त करने का मन बना लिया है। यथास्थिति में कोई बदलाव ना आए इसलिए कुछ चीखों और किटकिटाहटों की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के लिए एक नया रास्ता बनाने का फैसला कर किया है।


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