तमिलनाडु : तिरुपुर में फंसे मजदूरों की मदद कर रहें है जिला कलेक्टर, अब तक 62 हजार से जयादा लोगों को बांट चुके हैं रिलीफ किट

लाॅकडाउन लगने के बाद सैकड़ों प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों से सैंकड़ों मजदूर भूखे-प्यासे पैदल ही अपने घरों के लिए चल पड़े हैं। सड़कों पर चलते इन मजदूरों की मदद करने के लिए कई संगठन, समाजसेवी और आम-आदमी आगे आए हैं, जिनकी तस्वीरें रोजाना इंटरनेट पर हमें देखने को मिल रही हैं। हाल ही में कुछ ऐसे ही दृश्य हमें तमिलनाडु के तिरुपुर शहर में देखने को मिले। जहां तिरुपुर के कलेक्टर डॉ. के विजयाकार्तिकेयन शहर में फंसे मजदूरों के लिए रिलीफ किट वितरण कर रहे हैं ताकि शहर में फंसे मजदूर स्वास्थ्य और सुरक्षित रहें। तिरुपुर में असम, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लगभग 3 लाख मजदूर हैं। जिला कलेक्टर शहर में अब तक 62 हजार से ज्यादा रिलीफ किट वितरित कर चुके हैं।

कंट्रोल रुम में जानकारी जुटाकर मदद कर रहे हैं

विजयकार्तिकेयन शहर में युद्धस्तर पर राहत के उपाय कर रहे हैं। श्रमिकों के बारे में जानकारी जुटाना, उनके लिए व्यवस्थाएं करना और अन्य सभी राहत गतिविधियों की निगरानी करने के लिए विजयकार्तिकेयन ने पहले एक कंट्रोल रूम स्थापित किया। जो 24×7 चालू रहता है। इस कंट्रोल रूम में मजदूरों से बात करने के लिए बहुभषीय ऑपरेटरों को नियुक्त किया है। जब भी उन्हें किसी कार्यकर्ता या भूख जा रहे श्रमिकों के समुदाय के बारे में पता चलता है, तो कंट्रोल रूम तुंरत उस पर काम करता है। तिरुपुर जिले में फैले 1,200 से अधिक स्वयंसेवकों और सरकारी अधिकारियों के साथ, कंट्रोल रूम संचालकों को व्यक्ति के बारे में जानकारी देकर विशिष्ट कार्य सौंपते हैं।

तीन समूह में बांटा श्रमिकों

तिरुपुर के कंट्रोल रूम के अधिकारी ने बताया “हमने श्रमिकों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया है। एक जहां आवास और भोजन का ध्यान रखते हैं। दूसरे समूह में ऐसे मजदूर शामिल हैं जिन्हें भोजन और आवश्यक सामान मिलता है लेकिन उनके पास आवास नहीं है। तीसरी श्रेणी उन श्रमिकों की है जिनके पास न आवास और न ही उन्हें आवश्यक सामान मिल रहा है। हमारा ध्यान अंतिम पर है। “तिरुपुर प्रशासन को हेल्पलाइन के माध्यम से मजदूरों के बारे में पता चलता है। जो राशन किट मजदूरों को प्रदान करते हैं जिसकी कीमत 755 रुपये है और इसमें 5 किलो चावल, 1.5 किलो गेहूं का आटा, 1 किलो दाल के साथ-साथ तेल, चीनी, बिस्कुट, चाय की धूल, प्याज, टमाटर और एक कार्टन बॉक्स शामिल हैं। यह मात्रा एक व्यक्ति को लगभग एक सप्ताह तक रहने के लिए पर्याप्त है।

62,744 लोगों की मदद कर चुके हैं अब तक

तिरुपुर प्रशासन अब तक 62,744 लोगों की मदद कर चुका हैं। इसके बारे में विजयाकार्तिकेयन ने कहा “चूंकि लॉकडाउन का विस्तार हो चुका है, इसलिए हमें श्रमिकों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी राशन देने की आवश्यकता है। हम कॉल मिलते ही श्रमिकों के जानकारीयों को सत्यापित करते हैं। उन चीजों के बीच में हम पूछते हैं कि उनको कितना राशन प्रदान कर रहे हैं। जिन लोगों को वेतन के बिना छोड़ दिया गया है या उन्होंने छोड़ दिया है, उन्हें पूरी प्राथमिकता दी जाती है। कई ऐसे हैं जो स्थायी पेरोल पर नहीं हैं। हमारा उद्देश्य सबसे पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”

राज्य सरकार के राहत अनुदान और सीएसआर निधियों के तहत चल रहा है अभियान

अब तक यह पहल राज्य सरकार के राहत अनुदान और सीएसआर निधियों के तहत चल रही थी। लेकिन IAS अधिकारी को कम से कम 1,325 अधिक किट खरीदने के लिए अब 10 लाख रुपये जुटाने की जरूरत है। पूरे भारत में आईएएस अधिकारी प्रवासी मजदूरों और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को दैनिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है।


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