राजस्थान के प्रहलाद मीणा की कहानी, रेलवे में गैंगमैन से IPS अफ़सर तक का सफ़र

राजस्थान के प्रहलाद मीणा की कहानी, रेलवे में गैंगमैन से IPS अफ़सर तक का सफ़र | सूचना
राजस्थान के प्रहलाद मीणा की कहानी, रेलवे में गैंगमैन से IPS अफ़सर तक का सफ़र (Image credit: YourStory)

कभी-कभी किसी की असल जिन्दगी की यात्रा इतनी प्रेरक होती है कि हमें वह किताबों की कहानियों-सी लगती है। इसी तरह एक असल जिन्दगी की कहानी है प्रहलाद मीणा की, जिन्होंने रेलवे में गैंगमेन से लेकर IPS अधिकारी तक का सफर तय किया। किसी फिल्मी कहानी की तरह उन्होंने भी अपनी गरीबी को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। उनकी सफलता की यात्रा में उतार-चढ़ाव की पगडंडी बहुत लंबी और संघर्ष भरी रही है।

प्रहलाद राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से गाँव आभानेरी (रामगढ़ पचवारा) के रहने वाले हैं। उनके परिवार के पास दो बीघा जमीन थी, जिसमें घर चला पाना मुश्किल था। दो वक्त की रोटी कमाने के लिये उनके माँ-बाप दूसरों के खेतों में बँटाई में खेती करके परिवार को चलाते थे। वह कक्षा में हमेशा प्रथम दर्जे का विधार्थी रहे, लेकिन उनके क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव था।

प्रहलाद ने 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में अपने स्कूल में प्रथम स्थान पाया। उनका मन विज्ञान विषय लेने का था। वह इंजीनियर बनने का सपना देखा करते थे। उनके गाँव के आसपास विज्ञान विषय का स्कूल नहीं था और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी उन्हें बाहर पढ़ाने का खर्च वहन कर सके।

उन्होंने 11वीं कक्षा में सरकारी स्कूल में मानविकी विषयों में प्रवेश ले लिया। 12वीं कक्षा में भी उनका स्कूल में प्रथम स्थान आया लेकिन अब उनकी प्राथमिकता बदल गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी कि वह उन्हें जयपुर में किराए पर कमरा दिला कर पढ़ा सके इसलिए उन्हें सबसे पहले नौकरी चाहिए थी।

प्रहलाद के गाँव से एक लड़के का भारतीय रेलवे में ग्रुप डी में गैंगमैन के पद पर चयन हुआ था तो उन्होंने भी अपना लक्ष्य गैंगमैन बनने का बना लिया और तैयारी करने लगे। वर्ष 2008 में जब वह बीए द्वितीय वर्ष में थे तब उनका चयन भारतीय रेलवे में भुवनेश्वर बोर्ड में गैंगमैन के पद पर हो गया। उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और उसी साल उनका चयन भारतीय स्टेट बैंक में सहायक (LDC) के पद पर हो गया। वहाँ नौकरी करने के साथ उन्होंने बी. ए. पूरा किया और आगे की पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2010 में उनका चयन भारतीय स्टेट बैंक में परीवीक्षाधीन अधिकारी के पद पर हो गया। इसके बाद उन्होंने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित होने वाली संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा दी, जिसमें उन्हें रेलवे मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली। अब वह दिल्ली में एक अच्छी नौकरी करने के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियाँ भी बखूबी निभा रहे थे। इसी के साथ ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी शुरु कर दी।

उनकी इच्छा थी कि एक बार सिविल सेवा परीक्षा तो पास करनी ही है, जिससे उनके जैसे ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों में आत्मविश्वास आ सके। साथ ही साथ वह अपने पचवारा क्षेत्र से पहले सिविल सर्वेंट बनना चाहते थे। वर्ष 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में वह प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए। वह बिना हताश हुए हिंदी साहित्य से MA करने लगे और नेट जेआरएफ की तैयारी में लग गए। इसी साल में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई कॉलेज लेक्चरर परीक्षा में वह शामिल हुए लेकिन साक्षात्कार के लिए चयनित होने के लिये एक नंबर से चूक गए। इस वक्त में प्रहलाद ने दुख मनाने की बजाए अपना प्रयास जारी रखा।

कहावत ‘अन्त भला तो सब भला’ को चिरतार्थ करते हुए वर्ष 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में न सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा में बल्कि उनका फाइनल सिलेक्शन भी हुआ और भारतीय पुलिस सेवा में उड़ीसा कैडर आवंटित हुआ। यह सब प्रहलाद की कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम था कि वह एक चतुर्थ श्रेणी की नौकरी से प्रथम श्रेणी की नौकरी तक का सफर पूरा कर पाए। उन्होंने असफ़लताओं को रुकावट नहीं बल्कि एक नई शुरुआत माना और अपना सफर जारी रखा। 


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