राईडर गर्ल पूरे देश की लडकियों को अपने काम से कर रही हैं मोटिवेट, इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में करा चुकी हैं नाम दर्ज

Vishakha Fulsunge aka RiderGirl Vishakha, India's first female motovlogger | Soochna
राईडर गर्ल पूरे देश की लडकियों को कर रही है मोटिवेट, इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज करा चुकी है – सूचना

भारत में कई ऐसी महिलाएं है जो अपने काम से समाज में मिसाल कायम करती हैं और समाज में प्रेरणास्रोत बनती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है 26 वर्षीय विशाखा फुलसुंज की जो आज देश में अपनी बाईक राइडिंग से काफी नाम कमा रही हैं और कई लड़कियों को प्रेरित कर रही हैं। उनका राइडिंग के प्रति जूनून बचपन से ही बहुत था। जो साल दर साल लगातार बढ़ता ही गया है। इसी जूनून और मेहनत के कारण अब विशाखा दिन पर दिन कई रिकाॅर्ड बना रही हैं। विशाखा ने अब तक दो बार इंडिया बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स नाम दर्ज करा चुकी हैं, जिसमें वे बंगाल की खाड़ी और अंडमान द्वीप समूह पार करने वाली पहली भारतीय महिला सवार बनी हैं। इसके अलावा विशाखा यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म से देश के युवाओं को मोटिवेट कर रही हैं।

सोशल मीडिया की ताकत का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं विशाखा

विशाखा ने साल 2017 से अपनी साहसिक यात्रा शुरू की। इसी वर्ष मार्च में विशाखा ने नर्मदा परिक्रमा और स्वच्छ भारत की पहल शुरू की। इस 8 दिन की यात्रा के दौरान विशाखा को कई गांवों, खेतों और पहाड़ो से गुजराना था। इसी यात्रा के दौरान विशाखा को रात रुकना पड़ा। लेकिन तीन गांव वालों ने उनको अकेली महिला होने के कारण होटल में रूम देने से मना कर दिया। इसके बाद विशाखा ने इंस्टाग्राम पर लाइव जाकर उनकी इस घटना के बारे में लोगों को बताया। जिसके बाद उनके फाॅलोअर्स ने गूगल पर उन होटलों के निगेटिव रिव्यू लिखे और खराब रेंटिंग दी। जिसके बाद विशाखा को सोशल मीडिया की ताकत का अहसास हुआ। वैसै विशाखा ने साल 2017 में यूट्यूब पर अपनी यात्राओं को शेयर करने के लिए अपनी यात्रा की वीडियोज बनाकर उसे एडिट कर अपने चैनल Rider Girl पर शेयर करती है। उनके इस यूट्यूब चैनल पर विशाखा के 431,000 से भी ज्यादा सब्सक्राइबर है।

महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाना चाहती है बिशाखा

जब बिशाखा ने मध्यप्रदेश में अपनी यात्रा पूरी कर थी उस दौरान बिशाखा ने कई तरह के अनुभव किए। उनमें एक यह भी था कि महिला एकल सवारों को पुरूषों के बराबर सक्षम नहीं माना जाता है, विशेष रूप से मध्यप्रदेश में। इसके बारे में बिशाखा ने कहा, “जब मुझे रूकना पड़ा, तो मुझे तीन होटलों ने मना कर दिया। जिन्होंने कहा कि वे एक अकेली महिला यात्री को रूम नहीं दे सकते। मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या सोचा था, लेकिन मुझे अंततः ऐसी होटल मिलीं जिसने मुझे रहने की अनुमति दी।” बिशाखा ऐसे लोगों की मानसिकता बदलना चाहती है। इसके लिए बिशाखा 10 लड़कियों को ट्रेनिंग दे रही हैं। विशाखा ने अपने बचपन के अनुभवों को शेयर करती हुए कहा, ”जब वे बचपन में राइडरों की ट्रेनिंग के लिए जाती थी। वहां ट्रेनिंग के लिए महिलाओं की तुलना में पुरूषों की संख्या ज्यादा थी। जब वे उनसे मदद के लिए पूछती थी या किसी कंपनी के साथ पार्टनरशिप करनी चाहती थीं तो उस समय सभी शर्मा जाते थे या उनकी मदद करे बिना चले जाते थे।” लेकिन वे इस दौरान भी आगे बढ़ी और मेहनत कर अपने सपनों को पूरा कर लोगों के लिए मिसाल बन रही है।

मां का मंगल सूत्र गिरबी रख खरीदी पहली बाईक, आज है बड़ी-बड़ी कपंनी बिशाखा की स्पाॅन्सर

विशाखा ने बिजनेस, मार्केटिंग और फाइनेंस में दोहरी विशेषज्ञता के साथ एमबीए किया है। बिशाखा जब 10वीं कक्षा में थीं उस दौरान मुंबई में एक बेकरी में अंशकालिक कैशियर के रूप में काम करना शुरू किया। जिसने उसे 2,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया। शाम 6 से 12 बजे की शिफ्ट में काम करती थीं। विशाखा ने 15 दिनों के बाद नौकरी छोड़ दी जब उसने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को घर तक पीछा करते देखा तो असुरक्षित महसूस किया। अपने जुनून का पालन करने के लिए, उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी बचत के साथ 2015 में अपनी मां का मंगल सूत्र गिरबी रख अपनी पहली बाइक – KTM U3 90 खरीदी। विशाखा ने अपनी बाइक का नाम कशिश (इच्छा) रखा। पहली बाईक उधारी में खरीदने के बाद आज बिशाखा सैमसंग, राइनोक्स, मामा अर्थ और रॉयल एनफील्ड जैसे बड़े-बड़े ब्रांडों के साथ पार्टनरशिप करती है।


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