घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए रायपुर पुलिस ने शुरू किया 'चुप्पी तोड़ो' कैंपेन

हाल ही में आए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से अब तक पूरे भारत में लिंग आधारित हिंसा में दो गुना वृद्धि हुई है, जिसमें महिलाएं सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं। इनमें कई ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं, जो खुद पर हो रहे अत्याचार की शिकायत करने से डरती या घबराती हैं। ऐसी महिलाओं की मदद करने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आरिफा शेख आगे आई है। उन्होंने महिलाओं की मदद करने के लिए ‘चुप्पी तोड़ो’ कैंपेन शुरू किया है। इस कैंपेन के तहत, शेख ने एक व्हाट्सएप नंबर (94791-91250) शुरू किया है, जहां महिलाएं खुद पर हो रहे अत्याचारों की शिकायत दर्ज करा सकती हैं और पुलिस से मदद ले सकती हैं।

जानिए क्या है ‘चुप्पी तोड़ो’ कैंपेन

‘चुप्पी तोड़ो’ कैंपेन महिलाओं पर हो रहे घरेलू हिंसा को रोकने और उनकी मदद करने के लिए शुरू किया गया है। इस कैंपेन के बारे मे लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है। पुलिस ने महिलाओं की मदद करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। महिलाओं की मदद करने के लिए एएसपी आरिफा ने चार ऑन-फील्ड टीमों का गठन किया है, इन चारों ऑन-फील्ड टीमों में महिला कांस्टेबल शामिल हैं।

इसके अलावा एक अन्य टीम भी गठित की गई है, जो पुलिस ऑफिस में शिकायतें प्राप्त करती है। अत्याचार की शिकायत मिलने के बाद , पुलिस पीड़ित को थाने बुलाने के बजाय उसके घर जाती है। वहां जाकर उनकी काउंसिलिंग की जाती है और मामला गंभीर होने पर प्रताड़ित महिला को रिश्तेदारों के घर पहुंचाया जाता है और आरोपियों को सजा दी जाती है।

कुछ महिलाओं को पुलिस खुद करती है फोन

कैंपेन शुरू करने के 10 दिन के अंदर 100 से अधिक महिलाओं ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है। जिनकी पुलिस ने काउंसिलिंग और मदद की है। इसके अलावा जिन महिलाओं के पास खुद का मोबाइल फोन नहीं है या फिर वे शिकायत दर्ज कराने में संकोच करती हैं तो उन्हें पुलिस पिछले एक साल के डाटाबेस के आधार पर फोन कर उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करती है। इसके अलावा यदि कोई महिला अपने आसपास किसी पुरुष सदस्य की मौजूदगी होने के कारण अत्याचारों के बारे में जानकारी नहीं दे पाती है या फिर जानकारी देने से डरती है तो वह अपने परिवार के सदस्यों को बता सकती हैं कि यह कोरोनोवायरस-संबंधी सर्वेक्षण है। इस फोन काॅल के दौरान महिलाओं से कुछ सवाल पूछे जाते हैं जिनमें

  1. क्या आप ठीक हैं?
  2. क्या आपको पुलिस की मदद की ज़रूरत है?
  3. क्या आपके पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य आपको नुकसान पहुंचा रहा है?
  4. क्या आपका पति शराब पीकर मारपीट करता है?
  5. क्या आप पर किसी तरह का अत्याचार हो रहा है?

जैसे सवाल शामिल होते हैं। इसके बाद मामले की गंभीरता के आधार पर पुलिस आगे जांच-पड़ताल करती है।

लाॅकडाउन में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा

कैंपेन की शुरुआत करने वाली एएसपी आसिफा शेख ने कहा, “नौकरियों के जाने के कारण पुरुषों में क्रोध और हताशा बढ़ी है और जिसके कारण उन्होेंने गुस्सा उतारने के लिए महिलाओं को मारना सबसे आसान विकल्प माना है। इसके अतिरिक्त, शराब पीने वालों पुरूषों में संयम की कमी की समस्या भी बढ़ी है। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन ने महिलाओं के लिए सभी रास्ते बंद कर दिए हैं।”

कैंपेन की शुरुआत के बारे में आरिफा ने कहा “हमने 13 मार्च की शुरुआत में लॉकडाउन लगाया था और कुछ दिनों के भीतर, महिला सेल (181) को घर पर दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने वाले कॉल में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। इस तरह के कॉल में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बहुत चौंकाने वाली थी। दो भीषण घटनाओं को रिकॉर्ड करने के बाद, हमें समस्या और इस तथ्य की गंभीरता का एहसास हुआ कि यह एक दीर्घकालिक मुद्दा है। दस दिनों के भीतर, हमने इससे निपटने के लिए ‘चुप्पी तोड़ो’ योजना तैयार की।”


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