मणिपुर की पुलिस अधिकारी फेसबुक पोस्ट के कारण आई सुर्खियों में, ड्रग डीलर को छोड़ने के लिए बनाया जा रहा था दबाव

मणिपुर की पुलिस अधिकारी फेसबुक पोस्ट के कारण आई सुर्खियों में, ड्रग डीलर को छोड़ने के लिए बनाया जा रहा था दबाव – सूचना

मणिपुर की पुलिस अधिकारी थुनाओजम बृंदा अपनी फेसबुक पोस्ट के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय का बन गई हैं। दरअसल कुछ समय पहले बृंदा ने ड्रग्स और हिरोइन तस्करी करने वालों पर कार्रवाई की थी। जिसमें उन्होंने एक ड्रग डीलर को भी गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से लगातार मणिपुर के मुख्यमंत्री और आला अधिकारी उन पर उस आरोपी को छोड़ने का दबाव बना रहे थे। जिसके बाद उन्होंने इस संदर्भ में फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की।

जिसमें उन्होंने बताया कि उनके सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद भी उन्हें सरकार से लज्जित होना पड़ रहा है। पोस्ट में उन्होंने कोर्ट की भी आलोचना की, उन्होंने जज पर आरोप लगाया कि जज ने आरोपी लुखोसी झोउ को तीन सप्ताह की जमानत दी थी, जिसे ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा उन्होंने पोस्ट में यह भी खुलासा किया है कि उन पर ड्रग डीलर को छोड़ने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था, जो उस समय स्वायत्त जिला परिषद (ADC), चंदेल के अध्यक्ष के रूप में सेवा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने किया आरोपों का खंडन

इस मामले के बारे में जब मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा “हम किसी भी ड्रग्स डीलर की मदद नहीं कर रहे हैं। चूंकि मामला अदालत में चल रहा है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा। लेकिन यह सभी को पता है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी न्यायिक कार्यवाही या अदालत के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, क्योंकि न्याय के सिरों को पूरा करने के लिए कानून अपने स्वयं के पाठ्यक्रम को लेता है। ड्रग्स अभियान पर हमारी सरकार की जंग जारी रहेगी और इस जांच में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वो शासन का कोई अधिकारी हो या फिर कोई और।”

आलोचनात्मक टिप्पणी के कारण बृंदा पर भी हुआ केस

इस पोस्ट में बृंदा की कोर्ट पर आलोचनात्मक टिप्पणी करने और जज को मिडिल फिंगर दिखाने के कारण उन पर नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की अदालत में उन पर अवमानना का मामला का चल रहा है। बृंदा ने अपना स्कूल पूरा होने के बाद Zoology honours में स्नातक डिग्री हासिल की हैं। इस कारण उन्हें कानून का अच्छा ज्ञान हैं। फिलहाल बृंदा, बॉर्डर ब्यूरो (NAB) और नारकोटिक्स मामलों के अतिरिक्त एसपी के रूप में सेवारत हैं और उनकी टीम ने जून 2018 में भाजपा के एक नेता और सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था और 4.595 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी, 2,80,200 गोलियां, 57.18 लाख रुपये नकद आदि पकड़ था। इस मामले के बारे में बृंदा ने बताया था कि उन्होंने जांच का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया था और न्याय की उम्मीद से उन्होंने कोर्ट को मामले में देखा था। हालांकि, सरकार ने पूर्व विशेष लोक अभियोजक और प्रभारी अधिकारी एनएबी को स्थानांतरित कर दिया। उन्हें भी एक निर्धारित कर्तव्य के बिना स्थानांतरित कर दिया गया था।

बृंदा ने कहा “पुलिस को प्रतिबद्ध व्यक्तियों का साथ नहीं मिला”

बृंदा ने कहा कि वह मणिपुर से बहुत प्यार करती हैं और उसके वर्तमान और भविष्य को उज्जवल देखना चाहती हैं। हम स्वस्थ युवाओं और बच्चों के बिना ऐसा कैसे कर सकते हैं? केवल माताओं की सामूहिक आवाज़ ही बच्चों को बचा सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने मणिपुर की सरकार और पुलिस के बारे में कहा “पुलिस अधिकारी कानून को अमल में लाते हैं। लेकिन ऊपर से दबाव पड़ने पर अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते हैं। बदलती परिस्थितियों के साथ तालमेल रखने के लिए मैंने पुलिस सुधारों पर जोर दिया था। लेकिन सुधारों को विधायी शक्ति में अच्छे और प्रतिबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता थी, जो मुझे नहीं मिला। लेकिन फिर भी मैं अपने लोगों को बचाना चाहती हूँ। मैं पारिस्थितिकी की रक्षा और मानवता को बढ़ावा देना चाहती हूँ और बच्चों के लिए बेहतर समाज छोड़ना चाहती हूँ। मेरी आत्मा हमेशा मणिपुर के लिए रही हैं और आगे भी रहेगी।”

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