बेबाक अंदाज वाले मेजर जनरल जीडी बख्शी, जानिए उनकी जिंदगी की कहानी

आपने कई बार न्यूज चैनलों की बहस में एक शख्स को देखा होगा, जिनकी बड़ी-बड़ी मूछें हैं और जो हमेशा पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात करते रहते हैं। इनका नाम है रिटायर्ड मेजर जनरल गगन दीप बख्शी। जनरल बख्शी 1971 में सेना में शामिल हुए थे और 2008 में रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद वह अक्सर न्यूज चैनलों पर राष्ट्रवादी बयान देते नजर आते हैं। उन्होंने कई बार यह बताया है कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से किस तरह से निपटना चाहिए। इतना ही नहीं, कई बार वह बहस के दौरान अपना आपा भी खो बैठते हैं और कैमरे के सामने ही लोगों को अपशब्द बोलने लगते हैं। उनके इस रवैये की तारीफ तो होती ही है, लेकिन कुछ लोग उनकी आलोचना भी करते हैं। जीडी बख्‍शी अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वह राष्ट्रहित के मुद्दों पर खुलकर अपनी आवाज बुलंद करते हैं और सेना विरोधियों व देश विरोधियों को जलील भी करते हैं।

Life story of Major GD Bakshi, a true Nationalist for true Indians ...
Image Credit : Today Headline News

जम्मू-कश्मीर राइफल्स का हिस्सा थे जीडी बख्शी

1950 में जबलपुर, मध्य प्रदेश में पैदा हुए मेजर जनरल जीडी बख्शी भारतीय सेना की जम्मू-कश्मीर राइफल्स का हिस्सा थे। उन्हें करगिल युद्ध में बटालियन को कमांड करने के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। बाद में उन्हें आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान एक बटालियन को कमांड करने के लिए सेना पदक से भी सम्मानित किया गया। जीडी बख्शी के पिता एसपी बख्शी भी जम्मू-कश्मीर स्टेट फोर्स (6 J&K रायफल्स) में चीफ एजुकेशन ऑफिसर थे। हालांकि वे नहीं चाहते थे कि उनका बेटा सेना में आए। वह अपने बेटे को आईएएस या आईएफएस बनाना चाहते थे।

भाई की मौत का बदला लेने के लिए सेना में आए

1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक खदान में हुए धमाके में जनरल बख्शी ने अपने भाई कैप्टन सृष्टि रमन बख्शी को खो दिया। तब वह महज 23 साल के थे। इस हादसे में उनके भाई के शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े हो गए थे। उनके शरीर के उन्हीं टुकड़ों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने भाई की अस्थियां विसर्जित करने के बाद ही जनरल बख्शी ने पाकिस्तान से अपने भाई की मौत का बदला लेने की ठानी और सेना में शामिल हो गए। मेजर बख्शी ने ‘बोस: एन इंडियन समुराई: नेताजी एंड द आईएनए: ए मिलेट्री एसेस्मेंट’ नाम की एक किताब भी लिखी है। बख्शी ने सैन्य संचालन महानिदेशालय में दो कार्यकालों में अपनी सेवाएं दी हैं। वह पहले मुख्यालय उत्तरी कमान (भारत) में पहले BGS (IW) रहे, जहां उन्होंने सूचना वॉरफेयर और मनोवैज्ञानिक कार्यों के साथ काम किया।

अमर्यादित भाषा के लिए भी हैं मशहूर

जनरल बख्शी को उनके विवादित बयानों और अमर्यादित भाषा के लिए भी जाना जाता है। पाकिस्तान से उनकी नफरत इस हद तक है कि डिफेंसिव ऑफेंसिव नाम के एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में उन्होंने पाकिस्तान को पागल कुत्ता तक कह दिया था, जो हर किसी को काटता फिरता है। है। कुछ दिन पहले टीवी डिबेट का उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस वीडियो में जनरल बख्‍शी लाइव डिबेट में एक पैनलिस्ट को भद्दी-भद्दी गालियां देते नजर आ रहे थे। अपनी इस अभद्र भाषा को लेकर जीडी बख्‍शी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आए थे। इसके लिए लोगों ने उन्हें ट्रोल करते हुए जमकर खरी-खोटी भी सुनाई थी। जनरल बख्शी ने अपने 37 साल के सैन्य जीवन में कई युद्ध देखे। 1971 में उनकी तैनाती चीन की सीमा पर रही। 1985 में वह पंजाब में तैनात थे, जब वहां आंतकवाद चरम पर था। 1987 में करगिल के कक्सर में और 200 में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भी उन्होंने सेवा दी।


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