स्वतंत्र शोधकर्ता ने खोजा 96 वर्ष पुराने भारतीय वीर पुरूष को, जिसे ब्रिटिश साम्राज्य ने किया था अल्बर्ट मेडल से पुरस्कारित

Independent researcher discovered 96-year-old Indian brave man, awarded by Albert Medal by British Empire- Soochna
Image credit: The Better India

इतिहास के हमने कई पुराने और रोचक किस्से आपने सुने होंगे। जिनके बारे में जानकर हमें विश्वास भी नहीं होता है। आज हम आपको इतिहास के एक ऐसे किस्से के बारे में बताने वाले है। जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। हाल ही में 33 वर्षीय स्वतंत्र शोधकर्ता अमित भगत ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के जंगलों में रहने वाले मदिया-गोंड जनजाति के व्यक्ति, साला वेलादी व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाई है। जिन्हें ब्रिटिश साम्राज्य के समय 1924 में सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार अल्बर्ट मेडल से सम्मानित किया गया था। लेकिन आज तक इस बहादुर वीर पुरूष के बारे में कहीं भी किसी तरह की जानकारी संग्रहित नहीं की गई है। आज हम आपको इस वीर पुरूष के बारे में बताने वाले और इन्हें क्यों वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

जानिए कौन है साला वेलादी और उनकी बहादुरी के बारे में

लंदन गैजेट रिपोर्ट के अनुसार, साला वेलादी ब्रिटिश साम्राज्य के नौकर थे। 12 मई 1924 को मध्य प्रांत के दक्षिण चंदा मंडल में साला वेलादी जंगल के रास्ते कैंप पर लौट रहे थे, उसी दौरान उनके साथ ब्रिटिश अधिकारी जार्ज भी उनके साथ आ रहे थे। उसी दौरान अचानक से जंगल में बाघ ने जार्ज पर हमला बोल दिया और जार्ज को बाघ ने अपनी गर्दन में दबोच लिया। इसी दौरान वेलादी ने जो बंदूक अपने हाथ में थी। वही बंदूक को उन्होंने जार्ज की जान बचाने के लिए बाघ पर बंदूक की मदद से बाघ पर हमला कर दिया। जिसके कारण बाघ ने जार्ज को अपनी गर्दन से थोड़ा छोड़ दिया।

इसके बाद एक बार फिर वेलादी ने बंदू के स्टाॅक से बाघ पर हमला बोल दिया जब तक बाघ ने जार्ज को अपने कब्जे में से छोड़ दिया। कुछ समय लगातार यही चलता रहा जिसके थोड़ी देर बाद बाघ ने जार्ज को छोड़ दिया। इसके बाद वेलादी ने एक बार फिर चिल्लाए और बाघ को जंगल में कुछ दूर भगा दिया। लेकिन इसी दौरान बाघ ने जार्ज की गर्दन को बुरी तरह काटा और वे बुरी तरह घायल हो चुके थे। इसके बाद वेलादी ने जार्ज को अपने कंधे पर बिठाकर मुरवाई वन ग्राम के चिकित्सालय तक ले गए। इसके बाद जार्ज को चंदा जिले के चिकित्सालय पहुंचा गया। जहां उन्हें ठीक होने में 11 महीने का समय लगा।

वेलादी को बहादुरी के लिए मिला अल्बर्ट मेडल

साला वेलादी को उनकी इस बहादुरी के लिए ब्रिटेन का सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार अल्बर्ट मेडल मिला। उन्हें यह पुरस्कार किंग जॉर्ज पंचम द्वारा वीरता के अपने अविश्वसनीय कार्य के लिए साम को सम्मानित किया गया था। जो उस समय सिर्फ दो ही लोगों को दिया गया था। लेकिन जब वह पुरस्कार स्वीकार करने के लिए लंदन की यात्रा नहीं कर पाए, तो उन्हें यह पुरस्कार मध्य प्रांत के गवर्नर सर फ्रैंक सेली से प्राप्त किया। उस समय राज्यपाल ने पदक को पिन करने के बजाय, उसे अपने हाथों से वेलिदा को दे दिया। पदक के अलावा, उन्हें एक रजत बेल्ट और उनके नाम के साथ एक रजत शस्त्र भी दिया गया था।

Independent researcher discovered 96-year-old Indian brave man, awarded by Albert Medal by British Empire- Soochna
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स्वतंत्र शोधकर्ता अमित भगत ने खोज की साला वेलादी की

33 वर्षीय स्वतंत्र शोधकर्ता अमित भगत, जो संयुक्त भारत बीमा कंपनी के साथ एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। अमित नवंबर 2014 में चंद्रपुर में तैनात थे। अपनी नौकरी के दौरान, इस इतिहास के शौकीन ने जिले के सभी प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों का दौरा करना शुरू कर दिया। उसी दौरान विदर्भ के जंगलों में पहुंच गए। लेकिन उन्हें 29 जनवरी 2019 को वापस मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद ब्रिटिश विदर्भ क्षेत्र के बारे में कुछ अभिलेखों को खोदने के बजाय उन्होंने इसके बारे जानकारी जुटाने का निर्णय लिया।

ब्रिटिश समाचार पत्रों से मिली जानकारी

अपने शोध के दौरान, उन्होंने गहरी खुदाई शुरू की और पहले समाजशास्त्री गोविंद सदाशिव घोरी के काम की खोज की, उसके बाद स्टेनली जेपसन की पुस्तक ‘बिग गेम एनकाउंटर्स’ और अंत में ब्रिगेडियर-जनरल आरजी बर्टन के ग्रंथ, ‘ए बुक ऑफ मैन-ईटर्स’। संक्षेप में लिखा था कि कैसे सामा ने एक ब्रिटिश वन अधिकारी को बचाया और अल्बर्ट मेडल से सम्मानित किया गया। उन्होंने ब्रिटिश समाचार पत्र अभिलेखागार को भी देखा और लगभग 10-12 ऐसी ही समाचार क्लिपिंग को ठीक उसी कहानी के साथ पाया। उन्होंने सोचा हो, यह एक समाचार वायर एजेंसी थी जिसने मई-जून 1925 के आसपास ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड और ब्रिटेन में प्रकाशनों को रिपोर्ट प्रदान की थी। इसी से उनको विश्वास हो गया कि यह बहुत बड़ी खबर है क्योंकि यह इतने सारे प्रकाशनों द्वारा कवर किया गया था।

Google Map के द्वारा मिली अमित को पहली सफलता

अमित को ब्रिटिश वन अधिकारी के बाद जॉर्जेटा नामक एक अंग्रेज के नाम पर एक गाँव के बारे में बताया। Google Map पर, इस गांव को अब पैटजजरपेटा के रूप में बुलाया जाता है। अमित की यह पहली बड़ी सफलता थी। इसके बाद अमित ने मुंबई से अपनी 1,100 किलोमीटर की यात्रा शुरू की, ताकि वेमा के बारे में अधिक जान सकें। 26 घंटे की यात्रा के बाद, वह बामणी रेंज के रेंज वन कार्यालय पहुंचे, जो गांव से मुश्किल से 15-20 किमी दूर है। हालांकि, वहां के रेंज अधिकारी ने उन्हें बताया कि तीन साल की सेवा के बावजूद, वह कभी भी गांव का दौरा नहीं किया था क्योंकि यह बहुत खतरनाक माना जाता था। पिछली बार जब वह कहीं बाहर गया, तो किसी ने उसके वाहन को जला दिया था।

वेलिदा के पोते लिगा से मिले अमित भगत

जब मैंने 18 मार्च 2019 को गाँव में प्रवेश किया, तब, मैं पहली बार उस गाँव सरपंच सामा के पोते लिंगा से मिला, और उसके बाद 70 के दशक में शमा के बेटे जोगा। थोड़ा हिचकिचाने के बाद, उनके परिवार के लिए इतना पर्याप्त था कि वह अल्बर्ट मेडल, जिसमें उनके नाम के साथ चांदी की एक पट्टिका, चांदी की बेल्ट और यहां तक ​​कि उन्हें 45 एकड़ ज़मीन देने वाला चार्टर भी शामिल है, में समा के बेशकीमती सामानों को बाहर लाने के लिए पर्याप्त था। इसके बाद लिंगा ने सबकुछ बताया। लिंगा की कहानियों के माध्यम से, अमित को पता चला कि जॉर्ज, सामा के प्रति कितना ऋणी था।

इस तरह के संबंध वे विकसित करते थे कि जॉर्ज ने मुदेवाही से सटे एक वन गांव की स्थापना की, जिसका नाम उन्होंने खुद के नाम पर रखा, एक छोटा सा आरक्षित वन लगाया और उन हिस्सों में सिंचाई की व्यवस्था स्थापित की। इसके अमित ने सबको अद्भुत कहानी के बारे में लोंगों को बताया जो कि पूरे महाराष्ट्र और भारतवर्ष के लिए बड़े गौरव की बात है। साला वेलिदा जैसै वीर पुरूष का आज भी भारत के अन्य बहादुर पुरूषों की तरह की सम्मान करना चाहिए और लोंगों को इसके बारे में जानकारी देनी चाहिए।


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