दूसरों के भरोसे रहकर नहीं बल्कि खुद मेहनत कर आगे बढ़ो: नेपोटिस्म पर राधिका मदान

नेपोटिज्म को लेकर खुलकर बोली रधिका मदान, कहा : दूसरों के भरोसे रहकर नहीं बल्कि खुद मेहनत कर आगे बढ़ो – सूचना

पिछले कुछ समय से बाॅलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर काफी तनाव चल रहा है। नेपोटिज्म की खबरों के कारण बाॅलीवुड दो हिस्सों में बंट गया है। जिसके कारण बाॅलीवुड में हो रहे नेपोटिज्म को लेकर कई सेलिब्रिटीज ने सोशल मीडिया और मीडिया के सामने अपनी राय बड़ी बेबाकी से रखी है और उनके खिलाफ हो रहे भेदभाव के बारे में भी खुल कर बता रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर ‘अंग्रेजी मीडियम‘ और ‘पटाखा’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी अभिनेत्री राधिका मदान ने हाल ही में न्यूज पोर्टल ‘बाॅलीवुड लाईफ’ को दिए इंटरव्यू में इस बारे में अपनी राय दी और बाॅलीवुड में चल रहे तनाव के बारे में भी रधिका इंटरव्यू में बोली।

मैं खुद जाकर डायरेक्टर से पूछती थी ऑडीशन दूं क्या: रधिका

इंटरव्यू में रधिका ने अपने बाॅलीवुड करियर के शुरूआती संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा कि मैं खुद जाकर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को पूछती थी, “मैं ऑडीशन दूं क्या! इसी तरह मुझे बाॅलीवुड में एंट्री मिली और मुझे अंग्रेज़ी मीडियम और पटाखा जैसी फिल्मों में मुझे रोल मिले। हमें दूसरों के भरोसे रहना बंद करना होगा, बल्कि खुद पर मेहनत करके हमें आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने आगे बताया कि, “हाँ! बाॅलीवुड में नेपोटिज्म की स्थिति है, हमें इसे बदलना होगा। लेकिन एक आउटसाइडर कर भी किया सकता है। इसलिए हमें शुरुआत में हमें खुदपर मेहनत करनी होगी और आगे बढ़ता रहना होगा।”

‘स्टूडेंट् ऑफ द ईयर’ के लिए सबसे खराब ऑडीशन दिया:

रधिका ने शुरुआत में दिए ऑडीशन्स के बारे में बताते हुए कहा कि मैंने शुरुआत में प्रमुख फिल्में खो दी थी, लेकिन मैं इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहरा सकती हूँ। मैंने शुरुआत में बाॅलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस में से एक धर्मा प्रोडक्शन में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के लिए भी ऑडीशन दिया। लेकिन वह मेरी जिंदगी का सबसे खराब ऑडीशन था। क्योंकि मैं वहां घबरा गई थी और उस दिन मुझे बुखार भी था जिस कारण अंदर से भी डरी हुई थी। यह मेरे लिए काॅल था लेकिन उस समय मैं खुद को साबित नहीं कर पाई।

शुरुआत में खुद पर काम किया:

रधिका ने अपने करियर के बारे में बताते हुए कहा, “जब मेरे पास फिल्में नहीं थी तो मैंनें मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दी। मैंने खुद से कहा, “यार! राधिका, इसके बाद आपको समय नहीं मिलेगा। मुझे समय मिला था तो मैंनें पेंटिंग बनाना सीखा और दूसरे काम किए। जो फिल्में मैनें पहले नहीं देखी थी उन्हें देखा और खुद को फिल्मों के लिए तैयार करने लगी। मुझे पता था जब आपको कोई रोल मिलता है तो आपके उस समय इतना ज्यादा समय नहीं होता है कि आप रोल के लिए अच्छे से तैयारी कर सको। बाद में मैंने अपनी मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग भी पूरी की।” अंत में उन्होंने कहा कि लड़ाई का कोई मतलब नहीं है। हम सबको मिलकर खूब मेहनत करनी चाहिए और बाॅलीवुड के लिए नई योजना बनाना चाहिए ताकि हम इसे और आगे ले जा सके।”

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