महिला कैब ड्राइवर ने लॉकडाउन के चलते नौकरी गँवाई, तो खुद की कैब सर्विस चालू कर की जन सेवा

मुंबई में खुद की कैब सर्विस के माध्यम से कई लोगों की मदद कर रहीं हैं यह महिला- सूचना

देश में लाॅकडाउन के मुश्किल समय से अब तक लोगों को कई चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई लोगों ने इस मुश्किल समय को एक अच्छे अवसर के रूप में भी देखा और कुछ अच्छा काम कर इस अवसर को भुनाया। कुछ ऐसी ही कहानी है मुबंई में रहने वाली 27 वर्षीय विद्या शेलके की। विद्या को भी अन्य लोगों की तरह लाॅकडाउन के दौरान अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी और घर बैठना पड़ा था। लेकिन विद्या ने इस कठिन समय को एक अवसर के रूप में देखा। लाॅकडाउन के दौरान विद्या ने कार से खुद की कैब सर्विस शुरू की और लाॅकडाउन के दौरान दूसरे शहरों में फंसे लोगों को घर पहुंचाने में उनकी मदद की। इस काम से विद्या ने खूब नाम और पैसा कमाया।

मदद के लिए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया

विद्या ने युवावस्था में ड्राइविंग सीखी थी और उन्हें ड्राइविंग का काफी शौक था। उन्होंने अपने शौक को प्रोफेशन में बदला। लाॅकडाउन के पहले विद्या मुंबई में आॅटोरिक्शा चलाती थी। लेकिन लाॅकडाउन के कारण उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी। जब विद्या ने लाॅकडाउन के कारण फंसे लोगों के बारे में सोचना शुरू किया तो उन्हें इस काम के बारे में विचार आया। इसके बाद विद्या ने अपने पति की कार से 12 रूपये प्रति किमी में खुद की कैब सर्विस शुरू की। विद्या ने अपनी कैब सर्विस के लिए एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर उसे शेयर किया। वीडियो शेयर करने के 10 मिनट बाद ही विद्या को कैब सर्विस के लिए कॉल आने लगे। इनमें सबसे ज्यादा बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं शामिल थी। विद्या ने अब तक 200 से अधिक लोगों को उनके मुकाम तक पहुंचाया है।

कार में कोरोना से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम

विद्या ने जब अपनी कैब सर्विस शुरू की, उस दौरान विद्या ने कोरोना से बचाव को भी मद्देनजर रखा। उन्होंने सोशल डिस्टेंनसिंग के उपाय के लिए यात्रा के दौरान सिर्फ दो लोगों को कार में बैठने के लिए अनुमति दी और अपनी आगे की साईट वाली सीट खाली रखी। इसके अलावा कार में हैंडसैनिटाईजर भी रख रखा है और जिसके पास मास्क नहीं है, उनके लिए कार में मास्क भी रखा है। उनकी कार में अधिकतर बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या दिहाड़ी मजदूरी सफर करते थे। जब उनसे पूछा गया कि लाॅकडाउन के समय तो अधिकतर शहरों और प्रदेशों की सीमा सील थी तो आप लोगों को शहर के बाहर ले जाने में कैसे सफल रही। विद्या ने इस बारे में बताया कि अधिकतर लोग आपातकालीन मामले वाले लोग होते थे। उनके लिए मैं शहर के प्रशासन से बात कर ई-पास की व्यवस्था करा देती थी। यदि उन्हें शहर के प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं मिलती थी तो मैं उन्हें बड़ी विनम्रता से मना कर देती थी।

160 किमी का सफर तय कर गर्भवती महिला को घर तक पहुचाया

विद्या ने कैब सर्विस की एक घटना को शेयर करते हुए बताया, “एक गर्भवती महिला थी, जो मुझे 160 किलोमीटर लंबी सवारी के लिए जुन्नार अपने घर ले गई। वह अकेली थी और उसके पास यात्रा का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे और उस महिला की किसी भी दिन डिलीवरी हो सकती थी। शहर के सरकारी अस्पताल खाली न होने के कारण उन्हें वहाँ मना कर दिया था और पैसों की कमी होने के कारण वह किसी अन्य अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकती थी। इसलिए मैंने जल्दी से उसका ई-पास बनवाया और यात्रा शुरू की। हम उसके घर से केवल 10 किलोमीटर दूर थे, जब चेकपोस्ट पर अधिकारियों ने सभी दस्तावेजों को सही होने के बावजूद उस महिला को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। उस समय कृषि सामानों का परिवहन करने वाले एक ट्रक ड्राइवर ने मदद की और एक असाधारण उपाय करने के बाद उस महिला को सुरक्षित घर पहुंचाने में कामयाब रही। यह एक ऐसी घटना है जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती हूँ।”

यात्रा के दौरान कई लोगों ने विद्या का आभार व्यक्त किया

विद्या ने अपनी कैब सर्विस के माध्यम से कई लोगों की मदद की। मुंबई में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले सुनील सदम ने बताया कि जब कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था। उस समय विद्या ने हमारी मदद की। विद्या ने सरकार के सभी प्रोटेकाॅलों को फाॅलो करते हुए हमारे लिए ई-पास बनवाया और हमें हमारे गाँव तक छोड़ा। यदि विद्या हमारी मदद नहीं करती तो मैं और मेरी पत्नी वहीं फंसे रहते। उनकी मदद के लिए उनका बहुत बड़ा आभारी हूँ। सुनील की तरह विद्या ने कई लोगों की मदद की है। विद्या ने अपने काम के बारे में बताया, “हम वास्तव में केवल एक समुदाय के रूप में इस तरह की परेशानियों को दूर कर सकते हैं। मैं एक जिम्मेदार नागरिक होते हुए और अपने कर्तव्यों का पालन कर, मैं अपनी कैब की सर्विस की पेशकश कर रही हूँ और साथ ही साथ कुछ पैसे कमा रही हूँ।”

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