बेंगलुरु में भूखे व जरूरतमंद लोगों का पेट भर रहे पब्लिक फ्रिज

भूखे लोगों को खाना खिलाना पुण्य का काम माना जाता है। इसी सोच के साथ कर्नाटक के बेंगलुरु शहर के कई इलाकों में ऐसे कई पब्लिक फ्रिज लगाए गए हैं, जिनमें लोग घर का बना खाना रख जाते हैं और जरूरतमंद लोग इनमें से खुद ही खाना लेकर अपनी भूख मिटा लेते हैं। इतना ही नहीं, खाने के साथ-साथ यहां लोग पुराने कपड़े, जूते, खिलौने, किताबें व अन्य सामान भी रख जाते हैं और जिन्हें जरूरत होती है, वो इसे उठा ले जाते हैं। बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट, ब्रुकफील्ड्स, इंदिरा नगर, कोरमंगला और बेंसन टाउन जैसे इलाकों के स्थानीय लोगों ने गरीबों और जरूरतमंदों का पेट भरने और उनकी मदद के लिए यह अनूठा तरीका निकाला है।

Fridge to Keep Food Fresh for Homeless? Talented Mum Makes it Happen in Bengaluru!
Image Credit : The Better India

ईसा फातिमा जैसमिन ने की थी पहल

नंवबर 2017 में ईसा फातिमा जैसमिन नाम की एक महिला ने इस तरह के पब्लिक फ्रिज की शुरुआत बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट इलाके से की थी। इससे पहले ईसा घर में बना खाना आसपास के लोगों में बांटती थीं। इसी दौरान लोगों की मदद के लिए उन्हें पब्लिक फ्रिज लगाने का खयाल आया। उन्होंने अपने इस खयाल को अमली जामा पहनाया और इस तरह शुरू हुआ भूखे लोगों का पेट भरने का उनका सफर। ईसा फातिमा पब्लिक फाउंडेशन नाम के एनजीओ की संस्थापक भी हैं। इस एनजीओ ने बेंगलुरु के अलावा चेन्नई में भी इस तरह के चार पब्लिक फ्रिज लगाए हैं। इसके साथ ही देश के दूसरे शहरों में भी अब यह पहल हो रही है।

खाने की बर्बादी रोकने को शुरू की थी मुहिम

अपनी इस पहल के बारे में ईसा फातिमा बताती हैं, ‘यह सब तब शुरू हुआ, जब मैं अपने घर का बचा खाना घर के पास बैठने वाली एक गरीब महिला को देती थी, क्योंकि मुझे खाने की बर्बादी पसंद नहीं थी। कई बार घर पर काफी खाना बच जाता था और मुझे समझ में नहीं आता था कि उस महिला के अलावा मैं वो खाना किसे दूं। बदकिस्मती से कुछ दिन बाद उस महिला की मौत हो गई। इसके बाद मेरे सामने फिर से यह समस्या पैदा हो गई कि बचे खाने को किस तरह इस्तेमाल किया जाए। तभी मेरे दिमाग में यह खयाल आया कि कोई ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां इस खाने को रखा जा सके और कोई जरूरतमंद उसी दिन उसे खा सके।’

मुश्किल भरी रही पब्लिक फ्रिज की शुरुआत

यहीं से शुरुआत हुई पब्लिक फ्रिज के सफर की। हालांकि इसके लिए ईसा को कई तरह की दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। लोगों को अपने आइडिया के बारे में बताना और उन्हें भरोसा दिलाना भी काफी मशक्कत भरा रहा। फ्रिज लगाने के लिए जगह चुनना और स्थानीय अधिकारियों की इजाजत लेना भी खासा मुश्किल काम था। ईसा बताती हैं, ‘बहुत से लोगों को तो यह समझ में ही नहीं आया कि पब्लिक फ्रिज के जरिए मैं क्या करना चाहती हूं। लोग पूछने लगे कि खाना सही लोगों तक पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? फ्रिज में खाना ठीक रहेगा, बासी तो नहीं हो जाएगा? फ्रिज के लिए बिजली का खर्च कौन देगा? या हमें इससे क्या फायदा होगा? वहीं दुकान और रेस्टोरेंट मालिकों को यह डर था कि अगर वे अपनी दुकान के सामने ऐसे फ्रिज रखेंगे तो उनके कारोबार पर असर पड़ेगा। इन सब सवालों के जवाब मेरे पास नहीं थे तो मैंने एक दूसरा तरीका सोचा।’

एनजीओ बनाकर शुरू की लोगों की मदद

अपने इस आइडिया को अंजाम तक पहुंचाने और लोगों के सवालों के जवाब देने के लिए सबसे पहले ईसा ने नगर बेंगलुरु निगम को इस काम के लिए राजी किया। इसके बाद उन्होंने पब्लिक फाउंडेशन नाम का एक एनजीओ बनाया और उसमें वॉलंटियर्स, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, भोजन, कपड़े व जूते दान करने वाले लोग और उनका इस्तेमाल करने वाले लोगों की मदद ली। ईसा फातिमा बताती हैं कि हर रोज सुबह सात बजे से लेकर रात नौ बजे तक ये फ्रिज करीब 400 गरीबों का पेट भरते हैं। रात के वक्त इन्हें बंद रखा जाता है। इन फ्रिजों में खाना रखने वाले लोगों से हमारी यही गुजारिश रहती है कि इनमें अच्छी तरह से पैक किया गया और गुणवत्ता से भरपूर घर का बना खाना ही रखा जाए। उन्होंने बताया कि इस काम में स्थानीय लोगों के साथ अब शहर के कई रेस्टोरेंट भी उनका साथ दे रहे हैं।

‘अच्छा काम करने की कोई उम्र नहीं’

ईसा फातिमा जैसमिन एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट हैं और 15 साल के एक बच्चे की मां भी, जिसने उन्हें इस काम के लिए प्रेरित किया। वह बताती हैं, ‘मैं एक बुटीक भी चलाती हूं और दूसरे पसंदीदा काम भी करती हूं। बहुत से लोगों ने मुझसे कहा कि समाज सेवा के लिए मैं अभी काफी छोटी हूं, लेकिन कोई भी अच्छा काम शुरू करने की कोई उम्र नहीं होती। मैंने कई बार दूर से गरीब व भूखे लोगों को पब्लिक फ्रिज से खाना व दूसरा सामान लेते देखा है। उस वक्त जो खुशी और सुकून उनके चेहरे पर होता है उसे बयां कर पाना नामुमकिन है। तब मुझे लगता है कि मेरी मेहनत सफल हो गई है।

कई रेस्टोरेंट बने इस मुहिम का हिस्सा

इस मुहिम का हिस्सा बने बाईब्लॉज नाम के रेस्टोरेंट के मैनेजर नीलेश बनसोड कहते हैं कि उन्होंने अपने रेस्टोरेंट के बाहर एक पब्लिक फ्रिज लगाया है। रेस्टोरेंट के स्टाफ को परोसा जाने वाला खाना ही इसमें रखा जाता है। एक दूसरे रेस्टोरेंट कैरेट्स के मालिक अमीर थापा का कहना है कि उनके रेस्टोरेंट के बाहर लगा पब्लिक फ्रिज रोजाना 30 से 40 लोगों का पेट भरता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहक भी अपनी तरफ से अब इसमें खाना रखने लगे हैं। वहीं ईसा फातिमा जैसमिन कहती हैं कि यह प्रोजेक्ट उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है और यह उनके लिए बहुत जरूरी है।


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